चाँद गली तो उतरा होगा

चाँद गली तो उतरा होगा
मुझसे शायद रूठा होगा

ज़हर प्याला दे कर मुझको
कुछ तो वो भी तढ़पा होगा

चुपके चुपके पोंछा होगा
आँख से गर कुछ टपका होगा

उसने ख़त तो भेजा होगा
मुझ तक ही न पहुंचा होगा

नींद उढ़ा कर मेरी वो भी
शब् भर छत्त पर टहला होगा

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