शाम का रंग और ये मौसम,
ठीक तो है पर ठीक नही!
हंसते-हंसते यूं रो देना,
ठीक तो है पर ठीक नही!
उसने हमको जाते-जाते,
इतने भर को रोका था!
उम्र बिताई है जिस घर में,
रूठ के जाना ठीक नही!
शाम का रंग और ये मौसम,
ठीक तो है पर ठीक नही!
हंसते-हंसते यूं रो देना,
ठीक तो है पर ठीक नही!
चांद-सितारे न लिखे होते,
हमनें ये कब मांगा था!
पर सुख की बात हुई थी,
आंसू दे जाना ठीक नही!