बैतूल मध्यप्रदेश सरकार ने 1 नवम्बर दिन सोमवार को अपनी 53 वी सालगिरह के अवसर पर जों प्रदेश का राजकीय गीत ” मध्यप्रदेश जय हो “ प्रसारित एवं प्रसारित किया है उसमें वह सूर्यपुत्री एवं न्याय के देवता शनिदेव की छोटी बहना तापी - ताप्ती - तपती का उल्लेख करना भूल गई राज्य सरकार की इस भूल से मध्यप्रदेश - गुजरात की जीवन रेखा कहलाने वाली मां सूर्य पुत्री ताप्ती के करोडो भक्तो की भावनायें आहत हुई है. मां ताप्ती जागृति मंच बैतूल ने इस बारे में राज्य के संस्कृति एवं जन सम्पर्क आयुक्त को अपना विरोध दर्ज करवाते हुये पूरे प्रदेश में जन आन्दोलन का शंखनाद करने की चेतावनी दी है. मंच से जुडे रामकिशोर पंवार ने मांग की है कि मध्यप्रदेश राज्य सरकार अपनी इस भूल को गंभीर अपराध स्वीकारते हुये उसे सुधार कर सूर्यपुत्री मां ताप्ती की महिमा की अनदेखी के प्रति खेद व्यक्त करे. मां ताप्ती जागृति मंच ने राज्य सरकार से अपने उस सवाल का जवाब मांगा है जिसमें राज्य सरकार अपने राज्यपत्र में सूर्यपुत्री मां ताप्ती के जन स्थान मुलताई - मुलतापी को आस्था एवं पवित्र नगरी घोषित किया था. राज्य सरकार जहां एक ओर डाकुओ की शरण स्थली बनी चम्बल नदी का जिक्र करना नहीं भूली वही दुसरी ओर साधु - संतो ऋषि - मुनियो जिसमें देवऋषि नारद - संत गुरूनानक देव की तपो भूमि रही मां ताप्ती के महात्म को भूल गई. सूर्यपुत्री मां ताप्ती का उल्लेख हिन्दुओं के सभी प्राचिन ग्रंथो एवं वेद तथा पुराणो में किया गया है. राज्य सरकार ने एक बार फिर सूर्यपुत्री मां ताप्ती की महिमा को एक बार फिर नारद मुनि की तरह विलोपीत करने का र्दुःसाहस किया है. वैस देखा जाये तो देश में ताप्ती एवं नर्मदा ही पश्चिमी मुखी पवित्र नदिया है. राज्य सरकार ने अपनी स्थापना की 53 वी सालगिरह पर गीत - संगीत में उस ताप्ती का नाम तक लेना उचित नहीं समझा जिस ताप्ती में आज भी अंतिम संस्कार या मरणोउपरांत मृतक की अस्थिया तीन दिन में गल जाती है. मां ताप्ती के मात्र नाम स्मरण करने से गंगा स्नान का लाभ मिलता है उसका नाम न लेकर प्रदेश की सरकार ने यह बताने का प्रयास किया कि ” गंगा घर के पास बहे तो पापो से क्या डर , सोचा था मरने से पहले डुबकी लगा लेगें.........! “ मध्यप्रदेश एवं गुजरात को अपने पावन निर्मल जल से सदियो से आंनदीत करने वाली सूर्यपुत्री मां ताप्ती की उपेक्षा पर राज्य सरकार भले ही कुछ बोले या न बोले लेकिन एक मां ताप्ती के भक्त - पुत्र - उपासक एवं उसे समर्पित व्यक्ति को जरूर मन में कहीं न कहीं कोई टीस जरूर होगी. एक गीत में पूरे प्रदेश की सभी नदियो का उल्लेख करने की चुनौती देकर अपनी गलती - भूल को छुपाने वाले प्रदेश के मंत्री - संत्री आखिर क्या बताना चाहते है कि बैतूल जिले में स्थित मां ताप्ती का धार्मिक महत्व क्या किसी से कम है या वे नहीं चाहते कि ताप्ती की महिमा जन - तन तक पहुंचे. बैतूल जिले के सभी सरकारी स्कूलो में कल से प्रदेष के गान का विरोध करते हुये मां तापती जागृति मंच ने जिले की जनता से सवाल किया है कि वे क्या अपने बच्चो को ताप्ती की जगह चम्बल की महिमा का गान करने के लिए कहेगें.....!