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हिन्दुस्तानी हिन्दु

 

 

भूलकर ये रूह गम मे रोती है

 

जबसे तुम नीद चुराकर आराम से सोने लगी

 

 

बदल जाती है रोज सोती ही मेरे

कल तुझे कैसे पहचानू

 

 

दिखाने प्यार मेरा दिल भी निकलता हू

 

आने के याद पहले वो मिलने आती है

 

 

 

दिल बंजर बन जाता है

ऐसे मत दिखो मेरी तरफ तेरी

निगाहो मे खंजर नजर आता है

 

अपने तो सपने है यू बेगाने से नही लगता है

डर खंजर चलाने वाले जिदंगी मे अपने है

 

 कहा जाती हो दिल मेरा तोडकर

 तेरा दीवाना ख्वाब मे देखे तुझे

उसे क्यो रूलाऊ ख्वाब उसका तोडकर

 

 याद बनकर ख्वाब ना आया करो

 यू रंच गम के हालात ठीक नही

अपने दीवाने को ना सताया करो

 

आज अंजान बन बैठी जो कल तलक थी हमारी दीदार की दुलारी

 

नफरत की यू निगाहे बनाकर जाम जहर का पीना सीखाया

 

यू नाम नही लिखवाया तेरे दीवानो मे

तू रहती फूलो के बाग मे

और आशिक रहते वीरानो मे लिखा रखा है

हमने अपना नाम तेरे दीवानो मे

 

बुझा मेरी दिल की सममा अपनी गलियो मे सबेरा क्यो किया

 

खुशीयो मे बहुत जीये अब आँसू पीकर देखते है

 

तू कहती अपना फिर पराई क्यो है

 

तेरी यादो मे अक्सर रोता है

यू खफा हो कर तुमतो चले गये

आज भी ख्वाब मे तेरे मै अक्सर होता हू

तेरी यादो मे तन्हा रोता हू

 

 

प्यार भरा दिल पत्थर से मारकर तोड दिया था

पग पग दिऐ अश्क और गम सितम के दलदल मे छोड दिया था

प्यार भरा दिल तोड दिया था

 

मिट जाने वाली पहचान लिऐ फिरते है

तुमसे पाते है नफरत की दुनिया अब लुटी शान लिऐ फिरते है

मरे हुऐ अरमान लिऐ फिरते है

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