हम तो जिनके सज़दे में जान लुटाए बैठे हैं
वो ही जाने क्यों हमसे आँख चुराए बैठे हैं
दिल के ही साथ साथ हँसती है
दिल के ही साथ साथ रोती है
आरजू दिल का कफ़न होती है
दिल के ही साथ दफ़न होती है
ज़िन्दगी में जब तलक मुझ पर तेरा साया नहीं था
ज़िन्दगी वो ग़ज़ल थी जिसमें बस मतला नहीं था
रात में चाँद ईद का मानो
दो-दो रूपों में उतर के आया
इक तो अम्बर पे निखर के आया
इक मेरी छत पे सँवर के आया
बूढ़े माँ-बाप से उनके रिश्ते
आप ही समझो कितने सच्चे हैं??
उनके अपनों में एक डॉगी है
एक बीबी है तीन बच्चे हैं
मौला! जीतेजी कभी फ़र्ज ना ईमान से जाऊँ
नाम लेते हुए तेरा ही जान से जाऊँ
नेकी का ओढ़ के कफ़न जहान से जाऊँ
चार कन्धों पे मैं जाऊँ तो शान से जाऊँ
मुए नैना उन्हें बदनाम किए बैठे हैं
जो कई क़त्ल का इल्ज़ाम लिए बैठे हैं
लाखों ग़म दिल में हैं खुशियाँ जो गिनो चंद नहीं
फिर भी उतरे हुए चेहरे मुझे पसंद नहीं
धन से अमीर होके भी मन से ग़रीब हैं
दुनिया में ऐसे लोग बड़े बदनसीब हैं
धर्म की जलती चिता पर वोटों की वो रोटियाँ
सेकते ही सेकते ही सेकते ही जा रहे
हम नाकारे हर दफ़ा स्वीकार संसद में उन्हीं को
भेजते ही भेजते ही भेजते ही जा रहे
जो खुदी को बुलंद रखता है
साथ उसके जहान होता है
अपनी किस्मत को कोसना छोड़ो
कर्म सबसे महान होता है
इतनी अरदास है मेरी मौला
तेरा बनकर रहूँ सदा के लिए
हाथ जोडूं तो बस तेरे आगे
हाथ उठाऊं तो बस दुआ के लिए
जो भी दोगे कबूल होगा हमें
कुछ नहीं हो तो बद्दुआ देदो
मेरे सब अरमान उस पल बस मेरी आहों में थे
जिनकी हम राहों में थे वो ग़ैर की बाहों में थे
जिस तरह से आदमी अब क्रूर दानव हो गया
लगता है पाषाण युग का आदिमानव हो गया
सारे आलम को ये शिकायत है
हमपे क्यूँ आपकी इनायत है
अब सफाई कोई नहीं देनी
जो मोहब्बत है तो मोहब्बत है
हौसले जिनके कम नहीं होते
उनके ग़म मानो ग़म नहीं होते
वक़्त लगता है सब्र लगता है
ख़्वाब सच एकदम नहीं होते
ये वक्त पर ही छोड़ दिया किसकी ख़ता थी
जिस बात पर जुदा हुए वो सबको पता थी
ये दुआ है मेरी मालिक से
मेरे ख़ातिर भले कमी दे दे
तेरी दुनिया में जो दुखी हो उन्हें
मेरे हिस्से की हर ख़ुशी दे दे
हौसला और आस मत छोडो
खुद को तनहा,उदास मत छोडो
जिन्दगी तुमको जिन्दगी देगी
जिन्दगी भर तलाश मत छोडो
मेरे चेहरे पे तुमने मले थे जो रंग
वो सब रंग तो पानी से धुल जाऐंगे
पर उनको मैं धोऊं भला किस तरह
जो रंग प्रीत के मन में घुल जाऐंगे
चार हुईं जो आँखें तो
डूब गए इन आँखों में
डूब गए तो डूब गए
खूब गए इन आँखों में
मुझको मेरी तरह समझती है
मेरा अच्छा-बुरा समझती है
मेरे बोले बिना समझती है
मेरी हर बात मां समझती है
उनके भाषण में इरादों के सिवा कुछ भी नहीं
सार में समझो तो वादों के सिवा कुछ भी नहीं
हम " ये जीतेंगे, वो जीतेंगे " में क्यों उलझे हैं
ऐसी बातों में विवादों के सिवा कुछ भी नहीं
या तो फिर मैं ही चुप रहा होता
या तो फिर तुमने सुन लिया होता
इतना गम क्यों उठाए रख्खा है
कुछ तो मुझको भी दे दिया होता
मौला मेरे मन के बुरे रंग साफ कर देना,
किसी का दिल जो दुखाया हो माफ कर देना
मिलन में तू बिछडन में तू ही,
पाने में या खोने में
हर लम्हा महफूज है तेरा,
मेरे दिल के कोने में
कुछ तो आखिर है दरमियाँ अपने,
तेरे जाने से आंख नम क्यों है ?
वरना मुझसे ये पूछता न खुदा,
हर दुआ में मेरा सनम क्यों है ??
आओ चांद और गगन की बात करें
दिल से दिल के मिलन की बात करें
कुछ समय तो भी सुनें मन की बात
हर समय तो न धन की बात करें
कैसे हम अपने दिल की बात कहें,
दिल को आदत है ख्वाब बुनने की।
हमको मौका नहीं है कहने का,
उनको फुरसत नहीं है सुनने की।।
अब वो हमही हों याहो कोई फरिश्ता,
डगमगा जानी है नीयत तय ही मानो,
देखना फिर आपका यूँ देखना,
सामने वाले की शामत तय ही मानो।
हमने ऑंसू नहीं बहाए थे, दिल पे मजबूरियों के साए थे।
बिखरे तिनके तुम्हें बता देंगे, हमने भी आशियाँ बनाए थे।।
राह संघर्ष की जो चलता है,
वो ही संसार को बदलता है।
जिसने रातों से जंग जीती है,
सूर्य बनकर वही निकलता है।।
छलक उठे जब मेरे आँसू
मुश्किल से उनको रोका ,
आँखों में तुम ही रहते हो
तुमको कैसे बहने देता ?
खतरे में आज देश की इज्जत बचाइए,
दंगल बना के रखदी है संसद बचाइए,
ये साँड लोकतंत्र के हमने ही चुने हैं,
चर चर के चबा जाऐंगे भारत बचाइए
ये जो तडप है,तुमसे मिलन की आशा है,
ऑंखों में भी ,कुछ तो प्यासा प्यासा है।
तुम जानो या ना जानो ये बात अलग ,
प्रिये! प्रेम की इतनी सी परिभाषा है।।
बिना बताए, बिना किराए,
क्यों रहते हो मेरे मन में
कौन हो तुम, क्यों मौन हो तुम
यूं जीवित हो मेरे जीवन में
यातो हम भी चलें, सूर्य को थामने
या समर्पण करें , रात के सामने
यातो बैठे रहें हम अनिर्णय के संग
फैसला क्या लिया है कहो आपने
आशा की इक किरण ही मिले तो बहुत
ना रुको चाँद की चाँदनी के लिए
हौसलों से भरा एक दिल चाहिए
मुश्किलों से भरी जिंदगी के लिए
रूह के जब उजाले भरे शेर में ............
तब ग़ज़ल ये हुई रौशनी की तरह ...............
हम घरौंदे बनाते हैं जज़्बात के............
आप आकर तो देखो ग़ज़ल की गली.......
ऍ ज़िन्दगी;न सोच कि रूठा हुआ हूँ मैं....
तुझको समेटने में ही बिखरा हुआ हूँ मैं.......
चुप हों तो पूँछते हैं क्यूँ नाराज़ हो सनम ...
कुछ बोलो तो कहते हैं कि पीछे ही पड़ गए
भूख से मैंने कहा , चल तुझे सुनाऊं ग़ज़ल ....
भूख बोली मेरे आका मुझे रोटी देदे ....
गर्दिश के दौर ने हमें क्या क्या दिखा दिया....
इक दिन में सब बदल गए अखबार की तरह....
जब भी ग़ज़लों से बात होती है ...
गुफ़्तगू सारी रात होती है ...
ग़ज़ल सी बात हो ग़ज़ल में तो ...
वो शरीकेहयात होती है ...
आओ ऐसे...कि सब लगाएँ गले... ,
जाओ ऐसे...जहान भी रो दे .....
मोहतरम आपके भाषण पे ध्यान कैसे दूं ....
पेट की आग तो रोटी की बात करती है ....
दुनिया लगे बुरी तो लगे माफ़ कीजिए ......
या दिल के आईने को ज़रा साफ़ कीजिए .....
सामने बैठकर आपने जब सुनी ........
बेअसर सी ग़जल में बज़न आ गया .............
तुम ज़रा मुस्कुरा दो सनम ......
.मेरा दावा है आलम बदल जाएगा .......
हम तो ज़रूर डूबते साहिल के आसपास...
जो तुम नहीं सम्हालते पतवार की तरह...
क्यूँ उजाले की बात करते हो ....
ये अँधेरे तुम्हीं ने बोए हैं ....
मेरे मतले से मेरे मक़ते तक....
मेरी ग़ज़लों में तेरी ख़ुशबू है....
वो मेरी इतनी फ़िक्र करते हैं...
बातों बातों में ज़िक्र करते हैं ...
तितलिओं को चमन में उड़ने दो ...
ख़ुशबुएँ कैद मत करो यारों ...